ਸ਼ੂਗਰ ਦਾ ਪੱਕਾ ਇਲਾਜ ਸੁਣੋ ਜੀ, ਸ਼ੇਅਰ ਕਰਿਓ ਆਪਣੇ ਦੋਸਤਾਂ ਨਾਲ, ਤਾਂ ਜੋ ਕਿਸੇ ਦਾ ਭਲਾ ਹੋ ਸਕੇ।

ਪੱਕਾ ਇਲਾਜ ਸ਼ੂਗਰ ਦਾ …….

ਇਸ ਵੀਡੀਓ ਵਿਚ ਤੁਸੀਂ ਦੇਖੋਗੇ ਕੇ ਇਕ ਮੁਸਲਿਮ ਵੈਦ ਸ਼ੂਗਰ ਦਾ ਇਲਾਜ ਦਾਸ ਰਿਹਾ ਹੈ ਜੋ ਕਾਫੀ ਹੱਦ ਤਕ ਕਾਮਜਾਬ ਜਾਪ ਰਿਹਾਅ ਹੈ ਜਿਹੜੇ ਵੀਰਾਂ ਨੂੰ ਸ਼ੂਗਰ ਦੀ ਪ੍ਰੋਬਲਮ ਹੈ ਉਹ ਇਸ ਦੇਸੀ ਨੁਕਸ਼ੇ ਨੂੰ ਜਰੂਰ ਅਜਮਾਉਣ ਕਿਓਂ ਕੇ ਇਸ ਵਿਚ ਕੋਈ ਸਾਈਡ ਇਫੈਕਟ ਵਾਲੀ ਗੱਲ੍ਹ ਨਹੀ ਹੈ ਸੋ ਆਪਣੇ ਦੋਸਤਾਂ ਮਿੱਤਰਾਂ ਨਾਲ ਇਸ ਵੀਡੀਓ ਨੂੰ ਜਰੂਰ ਸ਼ੇਅਰ ਕਰੋ ਤਾਂ ਜੋ ਉਹਨਾਂ ਦਾ ਭਲਾ ਹੋ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ ਵੀਡੀਓ ਤੁਸੀਂ ਪੋਸਟ ਦੇ ਅਖੀਰ ਵਿਚ ਜਾ ਕੇ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ

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जब मानसिक तनाव बढ़ने लगे अनिद्रा सताने लगे…. सुंदरता पर काली घटा छाने लगे तब तुम खसखस का प्रयोग करना शेयर जरूर करे …

पौष्टक और स्वाद से भरपूर खसखस का इस्तेमाल सब्जी की ग्रेवी बनाने और सर्दी के दिनों में स्वादिष्ट हलवा बनाने के लिए किया जाता है। यह स्वाद और सेहत से भरपूर है, इसलिए स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार करने के लिए भी इसे दवा के रूप में प्रयोग करते हैं। आइए जानते हैं, खसखस के ऐसे ही बेहतरीन गुणों के बारे में………

खसखस के 10 चमत्कारी फ़ायदे :Image result for खसखस के 10 चमत्कारी फ़ायदे
दर्द भगायें राहत दिलाए : खसखस को दर्द निवारक के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसमें पाया जाने वाला ओपियम एल्कलॉइड्स सभी प्रकार के दर्द को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खास तौर से इसका प्रयोग मांसपेशियों के दर्द में किया जाता है। खसखस का तेल भी बाजार में उपलब्ध होता है, जिसका प्रयोग दर्द वाले स्थान पर किया जाता है।……..Image result for खसखस के 10 चमत्कारी फ़ायदे
नींद न आए, तो खसखस का दूध आजमाएं : अगर आप नींद न आने की समस्या से परेशान हैं, तो सोने से पहले खसखस का गर्म दूध पीना आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। यह अनिद्रा की समस्या को दूर करता है। यह आपको नींद लेने के लिए प्रेरित करेगा।सांस संबंधी समस्याओं में : सांस संबंधी तकलीफ होने पर भी खसखस काफी फायदेमंद होता है। इसके साथ ही यह खांसी को कम कर सांस संबंधी समस्याओं में लंबे समय तक आराम दिलाने में भी मदद करता है।……….Image result for खसखस के 10 चमत्कारी फ़ायदे
शरीर को उर्जा से भर दे : खसखस फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत है, जिसका प्रयोग करने से कब्ज की समस्या नहीं होती। इसके अलावा यह बेहतर पाचन में भी मदद करता है और शरीर को उर्जा देने के लिए भी बहुत लाभदायक होता है। गुर्दे की पथरी में फ़ायदेमंद : गुर्दे की पथरी में इलाज के तौर पर भी खसखस को सेवन किया जाता है। इसमें पाया जाने वाला ओक्सलेट्स, शरीर में मौजूद अतिरिक्त कैल्शियम का अवशोषण कर गुर्दे में पथरी बनने से रोकता है।मानसिक तनाव से बचाता है : खसखस मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने के साथ-साथ त्वचा पर होने वाली झुर्रियों को भी कम करने में मदद करता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो आपको जवां बनाए रखने में मदद ..करते है।Image result for खसखस के 10 चमत्कारी फ़ायदे
त्‍वचा की जलन व खुजली : खसखस त्वचा को नमी प्रदान करने में भी सहायक होता है। यह त्‍वचा की जलन व खुजली को कम करने के साथ ही एक्जिमा जैसी समस्याओं से लड़ने में मदद करता है।……सेहत के साथ सुंदरता का कांबिनेशन : 8 ओमेगा-6 फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर से भरपूर होने के साथ ही खसखस में फाइटोकेमिकल्स, विटामिन बी, थायमिन, कैल्शियम और मैंगनीज भी पाया जाता है, जो पोषण के लिहाज से बहुत फायदेमंद है। प्राकृतिक चमक से चेहरा दमकाएँ : त्वचा को खूबसूरत बनाने के लिए खसखस का इस्तेमाल दूध में पीसकर फेसपैक के रूप में किया जाता है।Image result for खसखस के 10 चमत्कारी फ़ायदे यह त्वचा को नमी प्रदान करने के साथ ही प्राकृतिक चमक लाता है, और चेहरा दमक जाता है।प्यास लगना, बुखार, सूजन या पेट में होने वाली जलन : इसके अलावा कई तरह की छोटी-छोटी समस्याओं जैसे अधि‍क प्यास लगना, बुखार, सूजन या पेट में होने वाली जलन से राहत पाने के लिए खसखस का प्रयोग किया जाता है। यह पेट में बढ़ने वाली गर्मी को भी शांत करने में सहायक है।

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इसकी सिर्फ़ 1 ग्राम मात्रा में विटामिन C संतरे से सात गुना….. विटामिन A गाजर से चार गुना….. कैलशियम दूध से चार गुना………. पोटेशियम केले से तीन गुना, प्रोटीन दही की तुलना में तीन गुना होता है शेयर जरूर करे

दुनीया का सबसे ताकतवर पोषण पुरक आहार है सहजन (Moringa/Drumstick Tree) 300 से अधिक रोगो मे बहुत फायदेमंद इसकी जड़ से लेकर फुल, पत्ती, फली, तना, गोन्द हर चीज़ उपयोगी होती है सहजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। एक अध्ययन के अनुसार इसमें दूध की तुलना में 4 गुना कैल्शियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। प्राकृतिक गुणों से भरपूर सहजन इतने औषधीय गुणों से भरपूर है कि इसकी फली के अचार और चटनी कई बीमारियों से मुक्ति दिलाने में सहायक हैं। यह सिर्फ खाने वाले के लिए ही नहीं, बल्कि जिस जमीन पर यह लगाया जाता है, उसके लिए भी लाभप्रद है। सहजन पेड़ नहीं मानव के लिए कुदरत का चमत्कार। इनका सेवन कर कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है, इसका बॉटेनिकल नाम ‘मोरिगा ओलिफेरा‘ है हिंदी में इसे सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं, जो लोग इसके बारे में जानते हैं, वे इसका सेवन जरूर करते हैं।सहजन का फूल पेट और कफ रोगों में, इसकी फली वात व उदरशूल में, पत्ती नेत्ररोग, मोच, साइटिका, गठिया आदि में उपयोगी है।इसकी छाल का सेवन साइटिका, गठिया, लीवर में लाभकारी होता है। सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात और कफ रोग खत्म हो जाते हैं।…..Image result for सहजन (Moringa/Drumstick Tree)

इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, साइटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। साइटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है।मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं और मोच के स्थान पर लगाने से जल्दी ही लाभ मिलने लगता है|सहजन की फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों के दर्द , वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है।इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है साथ ही इसकी सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है।सहजन (Moringa/Drumstick Tree) के पौष्टिक गुणों की तुलना1. 100 ग्राम सहजन फली में – 5 गिलास दूध जितनी ताकतवर2. विटामिन C – संतरे से सात गुना (1 ग्राम सहजन)3. विटामिन A – गाजर से चार गुना (1 ग्राम सहजन)4. कैलशियम – दूध से चार गुना (1 ग्राम सहजन)5. पोटेशियम – केले से तीन गुना (1 ग्राम सहजन)6. प्रोटीन – दही की तुलना में तीन गुना (1 ग्राम सहजन)……Image result for सहजन (Moringa/Drumstick Tree)

सहजन (Moringa/Drumstick Tree) के फूल, फल, छाल और पत्ती के गुण इसकी जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता हैसहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के किड़े निकालता है और उल्टी-दस्त भी रोकता हैब्लड प्रेशर और मोटापा कम करने में भी कारगर सहजन का रस सुबह-शाम पीने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है।इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होनेलगता है इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है इसके कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होता है इसके अलावा इसकी जड़ के काढ़े को सेंधा नमक और हिंग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है। इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होते हैं….पानी के शुद्धिकरण के रूप में कर सकते हैं इस्तेमाल सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीज को चूर्ण के रूप में…..पीसकर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लेरीफिकेशन एजेंट बन जाता है यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है , बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है।Image result for सहजन (Moringa/Drumstick Tree)

काढ़ा पीने से क्या-क्या हैं फायदे…कैंसर और पेट आदि के दौरान शरीर के बनी गांठ , फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन , हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है यह भी पाया गया है कि यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द) , जोड़ों में दर्द, लकवा, दमा,सूजन, पथरी आदि में लाभकारी है |सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से वायरस से होने वाले रोग, जैसे चेचक के होने का खतरा टल जाता है……शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है ….सहजन में हाई मात्रा में ओलिक एसिड होता है , जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। सहजन में विटामिन-सी की मात्रा बहुत होती है। यह शरीर के कई रोगों से लड़ता है। सर्दी-जुखाम….यदि सर्दी की वजह से नाक-कान बंद हो चुके हैं तो , आप सहजन को पानी में उबालकर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होगी।…Image result for सहजन (Moringa/Drumstick Tree)

सहजन (Moringa/Drumstick Tree) के अन्य 35 चमत्कारी फ़ायदे 1. सहजन के फूल उदर रोगों व कफ रोगों में इसकी फली वात व उदरशूल में पत्ती नेत्ररोग, मोच ,शियाटिका ,गठिया आदि में उपयोगी है।2. सहजन की जड़ दमा, जलोधर, पथरी,प्लीहा रोग आदि के लिए उपयोगी है तथा छाल का उपयोग साईटिका, गठिया, यकृत आदि रोगों के लिए श्रेयष्कर है।3. सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर,वातघ्न,रुचिकारक, वेदनाशक,पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है।4. सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वातए व कफ रोग शांत हो जाते है, इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, शियाटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। साईटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है।5. सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है।6. सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व बहत्तर प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है।7. सहजन की सब्जी खाने से पुराने गठिया और जोड़ों के दर्द व वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है।8. सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है।9. सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है।Image result for सहजन (Moringa/Drumstick Tree)
10. सहजन की जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है।11. सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उलटी दस्त भी रोकता है।12. सहजन फली का रस सुबह शाम पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है।13. सहजन की पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे धीरे कम होने लगता है।14. सहजन की छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़ें नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है।15. सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है।16. सहजन की जड़ का काढे को सेंधा नमक और हिंग के साथ पिने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है।17. सहजन की पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सुजन ठीक होते है।18. सहजन के पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाए या इसके बीज घीसकर सूंघे तो सर दर्द दूर हो जाता है।19. सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है।20. सहजन में विटामिन सी की मात्रा बहुत होती है। विटामिन सी शरीर के कई रोगों से लड़ता है खासतौर पर सर्दी जुखाम से। अगर सर्दी की वजह से नाक कान बंद हो चुके हैं तोए आप सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होगी।21. सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आयरन, मैग्नीशियम और सीलियम होता है।22.सहजन का जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है।23. सहजन में विटामिन ए होता है जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिये प्रयोग किया आता जा रहा है। इस हरी सब्जी को अक्सर खाने से बुढापा दूर रहता है। इससे आंखों की रौशनी भी अच्छी होती है।24. सहजन का सूप पीने से शरीर का रक्त साफ होता है। पिंपल जैसी समस्याएं तभी सही होंगी जब खून अंदर से साफ होगा।25. सहजन के बीजों का तेल शिशुओं की मालिश के लिए प्रयोग किया जाता है। त्वचा साफ करने के लिए सहजन के बीजों का सत्व कॉस्मेटिक उद्योगों में बेहद लोकप्रिय है। सत्व के जरिए त्वचा की गहराई में छिपे विषैले तत्व बाहर निकाले जा सकते हैं।…..Image result for सहजन (Moringa/Drumstick Tree)
26. सहजन के बीजों का पेस्ट त्वचा के रंग और टोन को साफ रखने में मदद करता है।मृत त्वचा के पुनर्जीवन के लिए इससे बेहतर कोई रसायन नहीं है। धूम्रपान के धुएँ और भारी धातुओं के विषैले प्रभावों को दूर करने में सहजन के बीजों के सत्व का प्रयोग सफल साबित हुआ है।27. सहजन पाचन से जुड़ी समस्याओं को खत्म कर देता है। हैजा, दस्त, पेचिश, पीलिया और कोलाइटिस होने पर इसके पत्ते का ताजा रस, एक चम्मच शहद, और नारियल पानी मिलाकर लें, यह एक उत्कृष्ट हर्बल दवाई है।28. सहजन के पत्ते का पाउडर कैंसर और दिल के रोगियों के लिए एक बेहतरीन दवा है। यह ब्लडप्रेशर कंट्रोल करता है। इसका प्रयोग पेट में अल्सर के इलाज के लिए किया जा सकता है। यह पेट की दीवार के अस्तर की मरम्मत करने में सक्षम है। यह शरीर की ऊर्जा का स्तर बढ़ा देता है।29. इसके बीज में पानी को साफ करने का गुण होता है। बीज को चूर्ण के रूप में पीस कर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लैरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है ।30. कुपोषण पीड़ित लोगों के आहार के रूप में सहजन का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। एक से तीन साल के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह वरदान माना गया है।……..Image result for सहजन (Moringa/Drumstick Tree)
31. सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। इसका काढ़ा साइटिका रोग के साथ ही, पैरों के दर्द व सूजन में भी बहुत लाभकारी है।32. इसका जूस प्रसूता स्त्री को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है। सहजन की पत्तियों के साथ ही सजहन का फल विटामिन्स से भरा होता है। सहजन में विटामिन ए होता है, इसीलिए यह सौन्दर्यवर्धक के रूप में काम करता है। साथ ही, यह आंखों के लिए भी लाभदायक होता है।33. पिंपल्स की प्रॉब्लम हो तो सहजन का सेवन करना चाहिए। इसके सूप से शरीर का खून साफ होता है। चेहरे पर लालिमा आती है और पिंपल्स की समस्या खत्म हो जाती है। सहजन की पत्तियों से तैयार किया गया सूप तपेदिक, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस आदि रोगों में भी दवा का काम करता है।34. इसमें कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आयरन, मैग्नीशियम और सीलियम होता है। इसीलिए महिलाओं व बच्चों को इसका सेवन जरूर करना चाहिए। इसमें जिंक भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो कि पुरुषों की कमजोरी दूर करने में अचूक दवा का काम करता है। इसकी छाल का काढ़ा और शहद के प्रयोग से शीघ्र प-तन की बीमारी ठीक हो जाती है और शारीरिक दुर्बलता भी समाप्त हो जाती है।35 सहजन में ओलिक एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह एक तरह का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। साथ ही सहजन में विटामिन सी बहुत मात्रा में होता है। यह कफ की समस्या में भी रामबाण दवा की तरह काम करता है। जुकाम में सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें।…….Thanks for watching & reading our post , hope you like all post . We do not own copyright of this material , all my post taken by different source like youtube, daily motion or different news website. We do not use any copyrighted material in my site. If you found any copyright material then go to our contact us page and send claim to us. We will remove copyriht post as soon as earlier.We are not posted any type of fake news ,all post are proper evidence that are real .If any person found that my post is fake news then also send your query with proof .Our aim to provide fresh & good material to you , we wants to give fast & viral news who sviral in social media . Also our post full fill facebook & google policies. We are not gather any personal information when you visit our website. Only third party ads are shown in my site , which we have no control .If you like my post then request to you please share with your friends on social media , whatsapp

14 हफ्ते में कैंसर सहित 172 बीमारियों को ठीक करने का दावा शेयर जरूर करे

छतरपुर से 25 किलोमीटर दूर ईशानगर के पचेर से सटे टीकमगढ़ के खरगापुर के चिनगुवां गांव के जंगल में माता का दरबार सजा हुआ है, जहां स्थित छोटे से मंदिर में एक युवती मौन धारण किए माता के रूप में विराजमान है।……… भगवाधारी यह युवती एवं इसके अनुयायी जड़ी-बूटी वाले पानी से असाध्य बीमारियों से निजात दिलाने का दावा कर रहे हैं। इस चमत्कारी माता का दावा है कि इनके पानी से 14 हफ़्तों में कैंसर जैसी बीमारी ठीक हो जाती है।……

यहां पहुंचने वाले लोगों का विश्वास है कि जिस बीमारी का इलाज दुनिया में कहीं नहीं है, उसका इलाज यहां होता है। लोगों का दावा है कि यहां मनुष्यों की 172 प्रकार की बीमारियों का सफल इलाज होता है। हर रविवार और बुधवार को दूर-दूर से लोग लाखों की संख्या में यहां पहुंच भी रहे हैं। कैंसर की लास्ट स्टेज वाले रोगी भी यहां इस उम्मीद से पहुंच रहे हैं कि यहां के पानी से उनका जीवन बच जाएगा।……….कैंसर पीड़ितों को यहां का जड़ी-बूटी युक्त पानी माता के हाथों से पीना और आशीर्वाद लेना पड़ता है, जबकि घाव के लिए जड़ी-बूटी पिसकर लगाने को दी जाती है। यहां इलाज कराने के लिए लोग मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, सहित देशभर के अन्य प्रांतों से भी पहुंच रहे हैं।………

यहां रुकने के इंतजाम न हो पाने के चलते लोग जंगल में ही पेड़ों पर झूला, मचान बनाकर और झुग्गी, मच्छरदानी, पन्नी तानकर रह रहे हैं। लोगों की भीड़ से स्थानीय लोगों सहित टैक्सी, ऑटो, बस वालों की चांदी हो गई है।….. रविवार और बुधवार को यहां हजारों की संख्या में वाहन आते-जाते रहते हैं।एक ओर जहां छतरपुर की शालिनी यादव को इलाज हेतु विदेश (स्पेन) जाना पड़ा तो वहीं छतरपुर में हर लाइलाज बीमारी के इलाज़ का दावा किया जा रहा है। क्या यही अंधविश्वास में आस्था है।………

बीमारी-कैंसर, टीवी, लकवा, हार्टअटैक, पथरी, शुगर, ब्लडप्रेशर, बांझपन, नामर्दी, रीढ़, हाथ, पैर, सिर, मुंह, पेट, पीठ, कमर, घुटने सहित अन्य 172 प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिए लोग यहां पहुंच रहे हैं। दूरदराज से आए लोग जंगल में ही झुग्गी बनाकर रात-दिन डेरा जमाए बैठे हैं, ताकि बुधवार और रविवार को लगातार इलाज करा सकें। ईतना ही नहीं यहां सैकड़ों की संख्या में छोटी-बड़ी दुकानें खुल गई हैं। खाना से लेकर चाय-नाश्ता, चाट-पकौड़ी, धूम्रपान, जनरल और भी कई प्रकार के रोजमर्रा के सामानों की दुकानें खुल गईं हैं। यहां छोटे-छोटे बच्चों ने भी दुकानें लगा रखीं हैं, जो नारियल, अगरबत्ती, प्लास्टिक के डिब्बे बेचने लगे हैं, जो रोजाना 200 से 300 रुपए कमा रहे हैं।Image result for चिनगुवां गांव

लोगों को पीने के पानी के लिए चढ़ावे से ही एक बोर कराया गया है। खाने के लिए यहां रोजाना भंडारा होता है जिसमें सुबह-शाम लोगों को खिचड़ी का वितरण किया जाता है। महिलाएं यहां भजन-कीर्तन कर रही हैं।….. यहां कई किलोमीटर तक जनता दिखाई देती है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कोई इंतजाम नहीं हैं।यह डर भी है : व्यवस्थापकों को यह डर भी सता रहा है कि भारी भीड़ के चलते यहां भगदड़ या कोई हादसा हो सकता है। लाखों की भीड़ को मात्र 4 पुलिस वाले ही जैसे-तैसे संभाल रहे हैं। यहां व्यवस्था संभाल रहे लोगों का कहना है कि हमने एसपी को आवेदन दिया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।Image result for चिनगुवां गांव

Note : हम किसी भी तरह के अंध विश्वास को बढ़ावा नही दे रहे और ना ही समर्थन कर रहे है, हम सिर्फ वहाँ पर दी जाने वाली जडी-बुटी के बारे में बताना चाहते है तभी यह पोस्ट की है, वहाँ रोगियों केे ठीक होने का जो भी करिश्मा होता है वो जडी-बुटी से होता है।………

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इन चीजों के सेवन से ब्लड की कमी होगी दूर…. इतना बनेगा ब्लड की सकते हैं डोनेट शेयर जरूर करे

आजकल के समय में देखा जाए तो व्यक्तियों में खून की कमी की समस्या बहुत ज्यादा देखने को मिल रही है हमारे देश में आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया सबसे अधिक पाया जाता है लगभग 90% व्यक्तियों में एनीमिया की समस्या है ज्यादातर यह स्त्रियों और छोटे बच्चों में होता है आयरन की कमी की वजह से एनीमिया की समस्या सबसे बड़ी है इस समस्या की वजह से त्वचा में पीलापन भूख घबराहट चक्कर आना कमजोरी थकान और इसी तरह की कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होती हैं पुरुषों को रोजाना 8 मिलीग्राम आयरन की आवश्यकता होती है वहीं महिलाओं को 18 मिलीग्राम आयरन की जरूरत पड़ती है यदि व्यक्ति के शरीर में आयरन की कमी हो तो इससे सिर दर्द याददाश्त पर असर पड़ना और एकाग्रता जैसी समस्याएं आना आम बात है इसके साथ ही व्यक्ति की कार्य क्षमता पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है परंतु आपको इसके लिए चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है एनीमिया कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसका कोई इलाज ना हो।……

यदि आप अपने आहार में कुछ ऐसी चीजों को शामिल करेंगे तो आप एनीमिया से छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं आज हम आपको इस लेख के माध्यम से किन चीजों को अपने आहार में शामिल करके एनीमिया जैसी समस्या से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं इसके विषय में जानकारी देने जा रहे हैं।

आइए जानते हैं किन चीजों को आहार में करें शामिल

काजू

वैसे देखा जाए तो ज्यादातर सभी लोगों को काजू खाना बहुत ही पसंद होगा काजू ना सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है बल्कि इसमें कई तरह के पौष्टिक गुण भी पाए जाते हैं 10 ग्राम काजू में 0.3 ग्राम तक का आयरन होता है यदि आप काजू का सेवन करेंगे तो आप अपने शरीर से आयरन की कमी को दूर कर सकते हैं जिन व्यक्तियों को खून की कमी है उनको काजू का सेवन सर्दियों में रोजाना करना चाहिए काजू पाचन शक्ति बढ़ाता है और गैस की समस्या भी दूर करता है।…….

बादाम

यदि आप 10 ग्राम भुने हुए बादाम खाते हैं तो आपको 0.5 मिलीग्राम आयरन प्राप्त होता है बादाम में कैल्शियम मैग्नीशियम पाया जाता है जो खून की कमी को दूर करता है।……

चिलगोजा

चिलगोजा के सेवन से आपके शरीर में आयरन की कमी दूर होती है 10 ग्राम चिलगोजा में 0.6 मिलीग्राम आयरन पाया जाता है चिलगोजा रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा में वृद्धि करने का कार्य करता है।…….

मूंगफली

मूंगफली के सेवन से हमारी सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है इसमें वसा की मात्रा कम होती है और पोटेशियम मैग्नीशियम और विटामिन B प्रचुर मात्रा में पाया जाता है इसके सेवन से शरीर में आयरन की कमी दूर होती है।…….

पिस्ता

पिस्ता भारत में आसानी से मिल जाता है इसमें आयरन के साथ-साथ मैग्नीशियम और विटामिन बी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है 28 ग्राम पिस्ता में 1.1 मिलीग्राम आयरन होता है परंतु आप इसका अधिक मात्रा में सेवन ना करें अन्यथा आपको मोटापे के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी होने की संभावना हो सकती हैं।……

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इन 4 घरेलू उपायों से आप जड़ से ख़त्म कर सकती हैं…. अपने पुराने से पुराने निशान को, ज़रूर शेयर जरूर करे

हर कोई चाहता है कि वह ख़ूबसूरत दिखे, लेकिन दाग़-धब्बे लोगों की ख़ूबसूरती पर ग्रहण लगा देते हैं। कई बार बचपन में खेलते वक़्त लोगों को चोटें लग जाती हैं, जिनके निशान जीवन भर रहते हैं। लाख कोशिशों के बाद भी ये निशान ख़त्म नहीं होते हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है ये निशान भी बड़े होते जाते हैं और ख़ूबसूरती को काम कर देते हैं। हादसे किसी भी व्यक्ति के जीवन में हो सकते हैं। कई बार हादसों की वजह से चेहरे पर चोट के निशान बन जाते हैं, जो ताउम्र रहते हैं।………

लोग इन निशानों को ख़त्म करने के लिए कई तरह के उपाय भी करते हैं, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं होता है। अगर आपके चेहरे या कहीं पर ऐसे घाव के निशान हैं जो ठीक नहीं हो रहे हैं तो आप चिंता मत कीजिए। आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे आप अपने इन घाव के निशानों को जड़ से ख़त्म कर सकते हैं। दादी-नानी के ये नुस्ख़े दाग़-धब्बे को जड़ से मिटाने में बहुत ही कारगर हैं।……..

इन 4 घरेलू नुस्ख़ों से कर सकते हैं चोट के निशान दूर:

*- नींबू:

नींबू हर घर में इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत ही फ़ायदेमंद होते हैं। इसका इस्तेमाल कई तरह के कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में भी किया जाता है। आपको जानकार हैरानी होगी कि नींबू घाव के निशान को मिटाने के लिए भी बहुत फ़ायदेमंद होता है। घाव के निशान को काम करने के लिए रुई में नींबू का रस लगाकर निशान वाली जगह पर लगाएँ। हर रोज़ लगातार कई दिनों तक ऐसा करने से घाव के निशान हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं। इसके वाला घाव के निशान को दूर करने के लिए आप टमाटर और आलू का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।……..

*- शहद:

शहद एक प्राकृतिक औषधि है। यह शरीर को कई तरह से लाभ पहुँचाने के साथ ही घाव के निशान को भी जड़ से ख़त्म करता है। दाग़ वाली जगह पर अगर नींबू के साथ शहद को मिलाकर लगाया जाए तो निशान जल्दी ख़त्म हो जाते हैं।…….

*- खीरा:

खीरा केवल खाने के काम में ही नहीं बल्कि सुंदरता बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। खीरा त्वचा को मुलायम बनाता है। अगर इसको चोट वाली जगह पर लगाया जाए तो चोट के निशान कुछ ही दिनों में जड़ से ख़त्म हो जाते हैं। इसके लिए आप पहले खीरे का पेस्ट बना लें और फिर उसे निशान वाली जगह पर लगाएँ। ऐसा कई दिनों तक लगातार करते रहने से निशान हमेशा के लिए ख़त्म हो जाते हैं।……..

*- चंदन पाउडर:

चंदन का इस्तेमाल सदियों से ख़ूबसूरती बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है। इसके साथ ही ये चोट के निशान को भी ख़त्म कर सकता है। चंदन पाउडर की मदद से आप अपने पुराने से पुराने निशान को भी जड़ से ख़त्म कर सकते हैं। घाव के निशान को जड़ से ख़त्म करने के लिए चंदन पाउडर में गुलाब जल की कुछ बूँदे मिलाकर पेस्ट बना लें फिर उसे निशान वाली जगह पर हर रोज़ सुबह शाम लगाएँ। इसे लगाने के बाद एक घंटे के लिए छोड़ दें, बाद में ठंडे पानी से इसे धो लें। आप गुलाब जल के साथ चंदन पाउडर में दूध भी डाल सकते हैं। इस उपाय से आपके दाग़ हमेशा के लिए दूर हो जाएँगे।……..

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दूध का ये 1 छोटा सा टोटका कर देगा आपको मालामाल…. यकीन नहीं आज़माकर देख लीजिए..शेयर जरूर करे

कहते हैं मनष्य का जीवन बहुत मुश्किल से मिलता है तो कुछ लोग कहते हैं मनुष्य का जीवन बहुत बेकार होता है. मगर सच्चाई ये है कि मनुष्य का जीवन मुश्किल से होता है जिसे वो अपने कर्मों से आसान बना सकता है. इंसान अपने जीवन में कई परिवर्तन देखता है और सच तो ये है कि परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है जिसे कोई नहीं बदल सकता. इस बात की जानकारी इंसान को होती है कि उसके जीवन में अच्छे और बुरे दिन आने ही हैं. ऐसे में कुछ इससे परेशान होकर ज्योतिषाचार्य के पास जाते हैं और अपनी स्थिति में बदलाव के लिए कई उपाय भी पूछते हैं. ज्योतिष उनकी कुंडली पढ़ते हैं और उसमें बुरे ग्रहों के प्रभावों और दुर्भाग्य को वजह बताकर उनके उपाय बता देते हैं. वे कुछ टोटके बताते हैं उन्हीं टोटकों में से है दूध का ये 1 छोटा सा टोटका कर देगा आपको मालामाल……

दूध का ये 1 छोटा सा टोटका कर देगा आपको मालामाल

ज्योतिष शास्त्र में इंसान के हर समस्या का समाधान बताया गया है. इंसान चाहे कितनी भी मुश्किलों या परेशानियों से गुजर रहा हो लेकिन ज्योतिष शास्त्रों में हर एक समस्या का समाधान बताया गया है……… घर में पैसों की कमी, नौकरी ना मिलना या फिर व्यापार में लाभ ना होना इन सभी समस्याओं का निवारण है ज्योतिष शास्त्र में. इन सभी परेशानियों को ठीक करने के लिए आज हम आपको दूध के कुछ टोटके बताने जा रहे हैं जिससे आपको धन लाभ होगा. तो चलिए आपको बताते हैं दूध के 4 अचूक टोटके, जिन्हें करने से आपके जीवन में मंगल ही मंगल होगा.

1. शायद ये बात आप जानते हों कि ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि दूध चंद्रमा होता है. अगर दूध को शिवलिंग पर चढ़ाया जाए तो व्यक्ति के सभी ग्रहों में मौजूद अशुभ प्रभाव खुद ही खत्म होने लगते हैं. ऐसा करने से सफलता आपके कदम चूमेगी और माता लक्ष्मी खुद आपसे प्रसन्न हो जाएंगी……..Image result for दूध2. अगर किसी की कुंडली में कोई ग्रह बहुत समय से अशुभ प्रभाव डाल रहे हैं तो उसे सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद शिव मंदिर जाकर कच्चा दूध चढ़ाना चाहिए. ये तो आपको भी पता होगा कि सोमवार का दिन शिव भगवान का होता है. जो भी व्यक्ति इस उपाय को लगातार 7 दिनों तक करता है उसके अशुभ ग्रहों की समस्या खत्म हो जाती है…….3. जिस मनुष्य को नौकरी और बिज़नेस में बहुत समय से कोई परेशानी आ रही है तो उसे हर सोमवार को भगवान शिव के मंदिर जाकर शिवलिंग पर दूध अर्पित करना चाहिए और इसके साथ रुद्राक्ष की माला से “ॐ सोमेश्वराय नम:” का 108 बार जाप करना चाहिए………Image result for दूध ऐसा करने से उस व्यक्ति को लाभ होने लगेगा4. अगर आपको धन की कमी है और काम भी पूरे नहीं हो रहे तो रविवार को एक गिलास में थोड़ा दूध रखकर सो जाएं और अगले दिन उसे बबूल के पेड़ की जड़ों में चढ़ा आएं. ध्यान रहे इसकी एक भी बूंद जमीन पर नहीं गिरनी चाहिए. ऐसा करने पर आपको धन लाभ होगा और साभी काम खुद ही बनने लगेंगे………….Thanks for watching & reading our post , hope you like all post . We do not own copyright of this material , all my post taken by different source like youtube, daily motion or different news website. We do not use any copyrighted material in my site. If you found any copyright material then go to our contact us page and send claim to us. We will remove copyriht post as soon as earlier.We are not posted any type of fake news ,all post are proper evidence that are real .If any person found that my post is fake news then also send your query with proof .Our aim to provide fresh & good material to you , we wants to give fast & viral news who sviral in social media . Also our post full fill facebook & google policies. We are not gather any personal information when you visit our website. Only third party ads are shown in my site , which we have no control .If you like my post then request to you please share with your friends on social media , whatsapp

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ਦੋਸਤੋ ਜਿਵੇ ਕੇ ਤੁਸੀਂ ਜਾਣਦੇ ਹੀ ਹੋ ਕੇ ਅਸੀਂ ਹਰ ਰੋਜ ਤੁਹਾਡੀ ਲਈ ਨਵੇਂ ਤੋਂ ਨਵੇਂ ਖਾਣਾ ਬਨਉਣ ਦੇ ਤਰੀਕੇ ਲੈ ਕੇ ਆਉਨੇ ਹਾਂ.Image result for हर्बल फेशियल
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तो इसलिये राजा-महाराजा करते थे सोमरस का सेवन…. आप भी सच जानकर हैरान हो जाओगे शेयर जरूर करे

नमस्कार दोस्तो, आशा है आप सब स्वस्थ होंगे। प्राचीन काल मे राजा सोमरस का इस्तेमाल किया करते थे। हमारे शास्त्रों और प्राचीन किताबों में सोमरस का उल्लेख किया गया है। आखिर ये सोमरस क्या होता था और क्यों इसका इस्तेमाल इतने जोर सौर से किया जाता था। क्या ये सोमरस आखिर आजकल की शराब का ही एक नाम था? चलिए आज हम आपको इसके बारे में ही बताते हैं। दोस्तो अगर आपने अभी तक हमे फॉलो नहीं किया है तो अभी कर लीजिए ताकि हम आपको सारी जानकारी समय से पहुंचा सके।कुछ लोग सोमरस को शराब बताते हैं। कहते हैं कि राजा महाराजा सोमरस का सेवन नशे के लिये करते थे। इससे पहले की हम आपको कुछ आगे बताये इससे पहले आप ये लाईने जरूर पढ़ें जो हमारे प्राचीन धर्म ग्रंथों में लिखी मिलती हैं, यह निचोड़ा हुआ शुद्ध दही मिलाया हुआ सोमरस, सोमपान की प्रबल इच्छा रखने वाले इंद्रदेव को प्राप्त हो। इसके अलावा ऋग्वेद में लिखा मिलता है कि हे वायुदेव, यह निचोड़ा हुआ सोमरस तीखा होने के कारण गाय के दुध में मिलाकर तैयार किया गया है आइये और इसका पान कीजिये। जब इस सोमरस का सेवन करने के लिए हमारे ग्रंथो में देवताओं का आवाहन किया गया हो तो ये एक शराब अर्थात मदिरा कैसे हो सकता है।..Image result for सोमरस

अक्सर शराब के समर्थक यह कहते सुने गए हैं कि देवता भी तो शराब पीते थे? सोमरस क्या था, शराब ही तो थी। प्राचीन वैदिक काल में भी सोमरस के रूप में शराब का प्रचलन था? या शराब जैसी किसी नशीली वस्तु का उपयोग करते थे देवता? कहीं वे सभी भांग तो नहीं पीते थे, जैसा कि शिव के बारे में प्रचलित है कि वे भांग पीते थे। लेकिन किसी भी पुराण या शास्त्र में उल्लेख नहीं मिलता है कि शिवजी भांग पीते थे। इसी तरह की कई भ्रांत धारणाएं हिन्दू धर्म में प्रचलित कर दी गई हैं जिसके दुष्परिणाम देखने को मिल भी रहे हैं।दरअसल, सोमरस, मदिरा और सुरापान तीनों में फर्क है। ऋग्वेद में शराब की घोर निंदा करते हुए कहा गया है-।।हृत्सु पीतासो युध्यन्ते दुर्मदासो न सुरायाम्।।अर्थात : सुरापान करने या नशीले पदार्थों को पीने वाले अक्सर युद्ध, मार-पिटाई या उत्पात मचाया करते हैं।यदि सोमरस शराब नहीं थी तो फिर क्या था?वेदों की इन ऋचाओं से जाना जा सकता है कि सोमरस क्या था। ऋग्वेद की एक ऋचा में लिखा गया है कि ‘यह निचोड़ा हुआ शुद्ध दधिमिश्रित सोमरस, सोमपान की प्रबल इच्छा रखने वाले इन्द्रदेव को प्राप्त हो।।(ऋग्वेद-1/5/5) …हे वायुदेव! यह निचोड़ा हुआ सोमरस तीखा होने के कारण दुग्ध में मिश्रित करके तैयार किया गया है। आइए और इसका पान कीजिए।। (ऋग्वेद-1/23/1)।।शतं वा य: शुचीनां सहस्रं वा समाशिराम्। एदुनिम्नं न रीयते।। (ऋग्वेद-1/30/2)… अर्थात नीचे की ओर बहते हुए जल के समान प्रवाहित होते सैकड़ों घड़े सोमरस में मिले हुए हजारों घड़े दुग्ध मिल करके इन्द्रदेव को प्राप्त हों।इन सभी मंत्रों में सोम में दही और दूध को मिलाने की बात कही गई है, जबकि यह सभी जानते हैं कि शराब में दूध और दही नहीं मिलाया जा सकता। भांग में दूध तो मिलाया जा सकता है लेकिन दही नहीं, लेकिन यहां यह एक ऐसे पदार्थ का वर्णन किया जा रहा है जिसमें दही भी मिलाया जा सकता है। अत: यह बात का स्पष्ट हो जाती है कि सोमरस जो भी हो लेकिन वह शराब या भांग तो कतई नहीं थी और जिससे नशा भी नहीं होता था अर्थात वह हानिकारक वस्तु तो नहीं थी। देवताओं के लिए समर्पण का यह मुख्य पदार्थ था और अनेक यज्ञों में इसका बहुविध उपयोग होता था। सबसे अधिक सोमरस पीने वाले इन्द्र और वायु हैं। पूषा आदि को भी यदा-कदा सोम अर्पित किया जाता है, जैसे वर्तमान में पंचामृत अर्पण किया जाता है।…Image result for सोमरस
आखिर सोम शराब नहीं है तो फिर क्या और कहां है…
सोम नाम से एक लता होती थी : मान्यता है कि सोम नाम की लताएं पर्वत श्रृंखलाओं में पाई जाती हैं। राजस्थान के अर्बुद, उड़ीसा के महेन्द्र गिरी, हिमाचल की पहाड़ियों, विंध्याचल, मलय आदि अनेक पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी लताओं के पाए जाने का उल्लेख मिलता है। कुछ विद्वान मानते हैं कि अफगानिस्तान की पहाड़ियों पर ही सोम का पौधा पाया जाता है। यह बिना पत्तियों का गहरे बादामी रंग का पौधा है।अध्ययनों से पता चलता है कि वैदिक काल के बाद यानी ईसा के काफी पहले ही इस वनस्पति की पहचान मुश्किल होती गई। ऐसा भी कहा जाता है कि सोम (होम) अनुष्ठान करने वाले लोगों ने इसकी जानकारी आम लोगों को नहीं दी, उसे अपने तक ही सीमित रखा और कालांतर में ऐसे अनुष्ठानी लोगों की पीढ़ी/परंपरा के लुप्त होने के साथ ही सोम की पहचान भी मुश्किल होती गई।सोम को 1. स्वर्गीय लता का रस और 2. आकाशीय चन्द्रमा का रस भी माना जाता है। सोम की उत्पत्ति के दो स्थान हैं- ऋग्वेद अनुसार सोम की उत्पत्ति के दो प्रमुख स्थान हैं- 1.स्वर्ग और 2.पार्थिव पर्वत।अग्नि की भांति सोम भी स्वर्ग से पृथ्वी पर आया। ‘मातरिश्वा ने तुम में से एक को स्वर्ग से पृथ्वी पर उतारा; गरुत्मान ने दूसरे को मेघशिलाओं से।’ हे सोम, तुम्हारा जन्म उच्च स्थानीय है; तुम स्वर्ग में रहते हो, यद्यपि पृथ्वी तुम्हारा स्वागत करती है। सोम की उत्पत्ति का पार्थिव स्थान मूजवंत पर्वत (गांधार-कम्बोज प्रदेश) है’। -(ऋग्वेद अध्याय सोम मंडल- 4, 5, 6)…Image result for सोमरस

स्वर्गीय सोम की कल्पना चंद्रमा के रूप में की गई है। छांदोग्य उपनिषद में सोम राजा को देवताओं में भोज्य कहा गया है। कौषितकि ब्राह्मण में सोम और चन्द्र के अभेद की व्याख्या इस प्रकार की गई है : ‘दृश्य चन्द्रमा ही सोम है। सोमलता जब लाई जाती है तो चन्द्रमा उसमें प्रवेश करता है। जब कोई सोम खरीदता है तो इस विचार से कि ‘दृश्य चन्द्रमा ही सोम है; उसी का रस पेरा जाए।’वेदों के अनुसार सोम का संबंध अमरत्व से भी है। वह पितरों से मिलता है और उनको अमर बनाता है। सोम का नैतिक स्वरूप उस समय अधिक निखर जाता है, जब वह वरुण और आदित्य से संयुक्त होता है- ‘हे सोम, तुम राजा वरुण के सनातन विधान हो; तुम्हारा स्वभाव उच्च और गंभीर है; प्रिय मित्र के समान तुम सर्वांग पवित्र हो; तुम अर्यमा के समान वंदनीय हो।’त्रित प्राचीन देवताओं में से थे। उन्होंने सोम बनाया था तथा इंद्रादि अनेक देवताओं की स्तुतियां समय-समय पर की थीं। महात्मा गौतम के तीन पुत्र थे। तीनों ही मुनि थे। उनके नाम एकत, द्वित और त्रित थे। उन तीनों में सर्वाधिक यश के भागी तथा संभावित मुनि त्रित ही थे। कालांतर में महात्मा गौतम के स्वर्गवास के उपरांत उनके समस्त यजमान तीनों पुत्रों का आदर-सत्कार करने लगे। उन तीनों में से त्रित सबसे अधिक लोकप्रिय हो गए।इफेड्रा : कुछ वर्ष पहले ईरान में इफेड्रा नामक पौधे की पहचान कुछ लोग सोम से करते थे। इफेड्रा की छोटी-छोटी टहनियां बर्तनों में दक्षिण-पूर्वी तुर्कमेनिस्तान में तोगोलोक-21 नामक मंदिर परिसर में पाई गई हैं। इन बर्तनों का व्यवहार सोमपान के अनुष्ठान में होता था। यद्यपि इस निर्णायक साक्ष्य के लिए खोज जारी है। हलांकि लोग इसका इस्तेमाल यौन वर्धक दवाई के रूप में करते हैं।’संजीवनी बूटी’ : कुछ विद्वान इसे ही ‘संजीवनी बूटी’ कहते हैं। सोम को न पहचान पाने की विवशता का वर्णन रामायण में मिलता है। हनुमान दो बार हिमालय जाते हैं, एक बार राम और लक्ष्मण दोनों की मूर्छा पर और एक बार केवल लक्ष्मण की मूर्छा पर, मगर ‘सोम’ की पहचान न होने पर पूरा पर्वत ही उखाड़ लाते हैं। दोनों बार लंका के वैद्य सुषेण ही असली सोम की पहचान कर पाते हैं।……Image result for सोमरस

यदि हम ऋग्वेद के नौवें ‘सोम मंडल’ में वर्णित सोम के गुणों को पढ़ें तो यह संजीवनी बूटी के गुणों से मिलते हैं इससे यह सिद्ध होता है कि सोम ही संजीवनी बूटी रही होगी। ऋग्वेद में सोमरस के बारे में कई जगह वर्णन है। एक जगह पर सोम की इतनी उपलब्धता और प्रचलन दिखाया गया है कि इंसानों के साथ-साथ गायों तक को सोमरस भरपेट खिलाए और पिलाए जाने की बात कही गई है।ईरान और आर्यावर्त : माना जाता है कि सोमपान की प्रथा केवल ईरान और भारत के वह इलाके जिन्हें अब पाकिस्तान और अफगानिस्तान कहा जाता है यहीं के लोगों में ही प्रचलित थी। इसका मतलब पारसी और वैदिक लोगों में ही इसके रसपान करने का प्रचलन था। इस समूचे इलाके में वैदिक धर्म का पालन करने वाले लोग ही रहते थे। ‘स’ का उच्चारण ‘ह’ में बदल जाने के कारण अवेस्ता में सोम के बदले होम शब्द का प्रयोग होता था और इधर भारत में सोम का।सोमरस बनाने की विधि।।उच्छिष्टं चम्वोर्भर सोमं पवित्र आ सृज। नि धेहि गोरधि त्वचि।। (ऋग्वेद सूक्त 28 श्लोक 9)अर्थात : उलूखल और मूसल द्वारा निष्पादित सोम को पात्र से निकालकर पवित्र कुशा के आसन पर रखें और अवशिष्ट को छानने के लिए पवित्र चर्म पर रखें।।।औषधि: सोम: सुनोते: पदेनमभिशुण्वन्ति।- निरुक्त शास्त्र (11-2-2)अर्थात : सोम एक औषधि है जिसको कूट-पीसकर इसका रस निकालते हैं।सोम को गाय के दूध में मिलाने पर ‘गवशिरम्’ दही में ‘दध्यशिरम्’ बनता है। शहद अथवा घी के साथ भी मिश्रण किया जाता था। सोम रस बनाने की प्रक्रिया वैदिक यज्ञों में बड़े महत्व की है। इसकी तीन अवस्थाएं हैं- पेरना, छानना और मिलाना। वैदिक साहित्य में इसका विस्तृत और सजीव वर्णन उपलब्ध है।सोम के डंठलों को पत्थरों से कूट-पीसकर तथा भेड़ के ऊन की छलनी से छानकर प्राप्त किए जाने वाले सोमरस के लिए इंद्र, अग्नि ही नहीं और भी वैदिक देवता लालायित रहते हैं, तभी तो पूरे विधान से होम (सोम) अनुष्ठान में पुरोहित सबसे पहले इन देवताओं को सोमरस अर्पित करते थे।बाद में प्रसाद के तौर पर लेकर खुद भी तृप्त हो जाते थे। आजकल सोमरस की जगह पंचामृत ने ले ली है, जो सोम की प्रतीति-भर है। कुछ परवर्ती प्राचीन धर्मग्रंथों में देवताओं को सोम न अर्पित कर पाने की विवशतास्वरूप वैकल्पिक पदार्थ अर्पित करने की ग्लानि और क्षमा- याचना की सूक्तियां भी हैं।सोमरस पीने के फायदे……वैदिक ऋषियों का चमत्कारी आविष्कार- सोमरस एक ऐसा पदार्थ है, जो संजीवनी की तरह कार्य करता है। यह जहां व्यक्ति की जवानी बरकरार रखता है वहीं यह पूर्ण सात्विक, अत्यंत बलवर्धक, आयुवर्धक व भोजन-विष के प्रभाव को नष्ट करने वाली औषधि है।Image result for सोमरस

।।स्वादुष्किलायं मधुमां उतायम्, तीव्र: किलायं रसवां उतायम।उतोन्वस्य पपिवांसमिन्द्रम, न कश्चन सहत आहवेषु।।- ऋग्वेद (6-47-1)अर्थात : सोम बड़ी स्वादिष्ट है, मधुर है, रसीली है। इसका पान करने वाला बलशाली हो जाता है। वह अपराजेय बन जाता है।शास्त्रों में सोमरस लौकिक अर्थ में एक बलवर्धक पेय माना गया है, परंतु इसका एक पारलौकिक अर्थ भी देखने को मिलता है। साधना की ऊंची अवस्थामें व्यक्ति के भीतर एक प्रकार का रस उत्पन्न होता है जिसको केवल ज्ञानीजन ही जान सकते हैं।सोमं मन्यते पपिवान् यत् संविषन्त्योषधिम्।सोमं यं ब्रह्माणो विदुर्न तस्याश्नाति कश्चन।। (ऋग्वेद-10-85-3)अर्थात : बहुत से लोग मानते हैं कि मात्र औषधि रूप में जो लेते हैं, वही सोम है ऐसा नहीं है। एक सोमरस हमारे भीतर भी है, जो अमृतस्वरूप परम तत्व है जिसको खाया-पिया नहीं जाता केवल ज्ञानियों द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है।….Image result for सोमरस

कण्व ऋषियों ने मानवों पर सोम का प्रभाव इस प्रकार बतलाया है- ‘यह शरीर की रक्षा करता है, दुर्घटना से बचाता है, रोग दूर करता है, विपत्तियों को भगाता है, आनंद और आराम देता है, आयु बढ़ाता है और संपत्ति का संवर्द्धन करता है। इसके अलावा यह विद्वेषों से बचाता है, शत्रुओं के क्रोध और द्वेष से रक्षा करता है, उल्लासपूर्ण विचार उत्पन्न करता है, पाप करने वाले को समृद्धि का अनुभव कराता है, देवताओं के क्रोध को शांत करता है और अमर बनाता है’।सोम विप्रत्व और ऋषित्व का सहायक है। सोम अद्भुत स्फूर्तिदायक, ओजवर्द्धक तथा घावों को पलक झपकते ही भरने की क्षमता वाला है, साथ ही अनिर्वचनीय आनंद की अनुभूति कराने वाला है।

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